Main> Buy Essays> Air pollution essay in marathi

Air pollution essay in marathi

Controlling <u>Air</u> <u>Pollution</u> from Motor Vehicles - NYS Dept. of.

Controlling Air Pollution from Motor Vehicles - NYS Dept. of. Such polluted air is causing health problems, diseases and death. How DEC controls pollution from cars, trucks and other vehicles.

<i>Essay</i> writing in <i>marathi</i> <i>pollution</i>

Essay writing in marathi pollution Day by day the fresh air of the environment is getting polluted because of the mixing of particulates, biological molecules, and other harmful materials. Essay writing in marathi pollution. write my essay fast today. learners with learning disabilities

<strong>Air</strong> <strong>pollution</strong> <strong>essays</strong> for students - Sweep our Soot

Air pollution essays for students - Sweep our Soot Air pollution refers to the contamination of atmospheric air due to the presence of some substances and gases (from anthropogenic or natural sources) which have harmful and poisonous effects. You are here Home / Uncategorized / Air pollution essays for students. psychology essay majhi aaji marathi essay websites macca essay.

Disqus - <u>Essay</u> on <u>air</u> <u>pollution</u> in <u>marathi</u>

Disqus - Essay on air pollution in marathi Sample and childhood respiratory allergies environmental the effects of human major disasters.

<em>Essay</em> on my favourite singer in <em>marathi</em> quizlet

Essay on my favourite singer in marathi quizlet मानवीय प्रदूषण जैसे सामाजिक प्रदूषण, राजनीतिक प्रदूषण, जातीय प्रदूषण, धार्मिक प्रदूषण, आर्थिक प्रदूषण आदि। सामान्य अर्थों में पर्यावरण प्रदूषण का प्रयोग भौतिक प्रदूषण के संदर्भ में किया जाता है। आधुनिक परमाणु, औद्योगिक, श्वेत एवं हरित-क्रान्ति के युग की अनेक उपलब्धियों के साथ-साथ आज के मानव को प्रदूषण जैसी विकराल समस्या का सामना करना पड़ रहा है। वायु जिसमें हम साँस लेते हैं, जल, जो जीवन का भौतिक आधार है एवं भोजन जो ऊर्जा का स्रोत है- ये सभी प्रदूषित हो गए हैं। प्रसिद्ध पर्यावरण वैज्ञानिक इ.पी. कोलाई बैक्टीरिया की जल में उपस्थिति को जल-प्रदूषण का सूचक माना जाता है। उद्योगों के जो संयंत्र लगाए जाते हैं उनमें से अधिकांश में जल का प्रचुर मात्रा में उपयोग होता है। प्रत्येक उद्योग में उत्पादन प्रक्रिया के उपरान्त अनेक अनुपयोगी पदार्थ शेष बचते हैं। ये पदार्थ जल के साथ मिलकर बहिःस्राव के रूप में निष्कासित कर समीप की नदी या अन्य जलस्रोत में बहा दिये जाते हैं। औद्योगिक बहिःस्राव में अनेक धात्विक तत्व तथा अनेक प्रकार के अम्ल, क्षार, लवण, तेल, वसा आदि विषैले पदार्थ होते हैं जो जल-प्रदूषण कर देते हैं। लुगदी तथा कागज-उद्योग, शकर-उद्योग, कपड़ा उद्योग, चमड़ा उद्योग, मद्य-निर्माण, औषधि-निर्माण, रसायन-उद्योग एवं खाद्य-संसाधन उद्योगों से विभिन्न प्रकार के अपशिष्ट पदार्थ बहिःस्राव (effluent) के रूप में नदी नालों में बहाए जाते हैं। इन प्रदूषक पदार्थों से जल दुर्गन्धयुक्त एवं गन्दे स्वाद वाला हो जाता है। इनमें से कुछ अपशिष्ट पदार्थ ऐसे भी होते हैं जो पेयजल शोधन में उपयोग में ली जाने वाली क्लोरीन के साथ मिलकर ऐसे यौगिक बना देते हैं जिनका स्वाद एवं गन्ध मूल पदार्थ से भी अधिक खराब होता है। कुछ विषैली धातुएँ जैसे आर्सेनिक खदानों से वर्षा के जल के साथ मिलकर जलस्रोत में मिल जाती हैं। औद्योगिक बहिस्राव में सर्वाधिक खतरा पारे से होता है। पारे के घातक प्रभाव का सबसे बड़ा उदाहरण जापान की मिनीमेटा (minimata) खाड़ी के लोगों को 1950 में हुई एक भयानक बीमारी है। रोग का नाम भी मिनिमेटा रखा गया। खोज करने पर विदित हुआ है कि ये लोग जिस स्थान की मछलियों को खाते थे उनके शरीर में पारे की उच्च सान्द्रता पाई गई। इस खाड़ी में एक प्लास्टिक कारखाने से पारे का बहिःस्राव होता था। आजकल अपनाई जाने वाली कृषि प्रणालियों को दोषपूर्ण तरीके से उपयोग में लेने से मृदा-क्षरण होता है, फलस्वरूप मिट्टी पेयजल में लाकर उसे गन्दा करती है। इसके अलावा अत्यधिक रासायनिक उर्वरक एवं कीटनाशकों के प्रयोग से कृषि बहिःस्राव में अनेक ऐसे पदार्थ होते हैं जो पेयजल में मिलने से उसे प्रदूषित करने में प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप में सहायक होते हैं। अधिकांश उर्वरकों में नाइट्रोजन एवं फॉस्फोरस होता है। अधिक मात्रा में जलाशयों में पहुँचने पर ये शैवाल उत्पन्न करने में सहायक होते हैं। अत्यधिक शैवाल जमा होने से जल पीने योग्य नहीं रह पाता तथा उनके अपघटक बैक्टीरिया की संख्या भी अत्यधिक हो जाती है। इनके द्वारा की जाने वाली अपघटन क्रिया से जल में ऑक्सीजन की मात्रा घटने लगती है एवं जल प्रदूषित हो जाता है। कीटनाशकों एवं खरपतवारनाशकों के रूप में उपयोग में लिये जाने वाले रसायन पारा, क्लोरीन, फ्लोरिन, फॉस्फोरस जैसे विषैले पदार्थों से बने होते हैं। ये पदार्थ निम्न प्रकार से कार्बनिक एवं अकार्बनिक रसायनों से बनते हैं- (अ) अकार्बनिक- (1) आर्सेनिक यौगिक (2) पारे के यौगिक एवं (3) गंधक के यौगिक (ब) कार्बनिक- (1) पारा या क्लोरीन युक्त हाइड्रोकार्बन एवं (2) तांबा, फॉस्फोरस के कार्बो-धात्विक यौगिक। कुछ कीटनाशक पदार्थ जो जल में मिल जाते हैं, जलीय जीवधारियों के माध्यम से विभिन्न पोषी-स्तरों में पहुँचते हैं। प्रत्येक स्तर पर जैविक क्रियाओं से इनकी सान्द्रता में वृद्धि होती जाती है। इस क्रिया को जैविक-आवर्द्ध (biomagnification) कहते हैं। यह प्रदूषण नदी-झीलों की अपेक्षा समुद्रीजल में अधिक होता है। समुद्री जल का तैलीय प्रदूषण निम्न कारणों से होता है- (1) जलायनों द्वारा अपशिष्ट तेक के विसर्जन से। (2) तेल वाहक जलयानों की दुर्घटना से। (3) तेल वाहक जलयानों में तेल चढ़ाते या उतारते समय। (4) समुद्र किनारे खोदे गए तेल कुओं से लीकेज के कारण। (अ) मनुष्य पर प्रभाव (ब) जलीय वनस्पति पर प्रभाव (स) जलीय जन्तुओं पर प्रभाव (द) विविध प्रभाव (1) पेयजल से- प्रदूषित जल के पीने से मनुष्य के स्वास्थ्य पर अनेक हानिकारक प्रभाव होते हैं। प्रदूषित जल में अनेक सूक्ष्म जीव होते हैं जो विभिन्न प्रकार के रोगों के या तो कारण बनते हैं या रोगजनक का संचरण करते हैं। प्रदूषित जल से होने वाले रोग निम्नानुसार हैं- बैक्टीरिया जनित- हैजा, टाइफॉइड, डायरिया, डिसेन्ट्री आदि। वाइरस जन्य- पीलिया, पोलियो आदि। प्रोटोजोआ जन्य- पेट तथा आँत सम्बन्धी अनेक विकार जैसे- अमीबिक डिसेन्ट्री, जिएर्डिसिस आदि। आँत के कुछ परजीवी जैसे एस्केरिस का संक्रमण पेयजल के द्वारा ही होता है। नारू के कृमि भी पेयजल में उपस्थित साइक्लोप्स के कारण मनुष्य में पहुँचते हैं। (2) जल-सम्पर्क से- प्रदूषित जल के शरीर-सम्पर्क होने पर अनेक रोग-कारक परजीवी मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। या फिर रोगी मनुष्य के शरीर से निकलकर जल में मिल जाते हैं। नारू इसका एक उदाहरण है। (3) जलीय रसायनों से- जल में उपस्थित अनेक रासायनिक पदार्थों की आवश्यकता से अधिक मात्रा में से स्वास्थ्य पर अनेक प्रभाव होते हैं। प्रदूषित जल से जलीय वनस्पति पर निम्न प्रभाव होते हैं- (i) बहिःस्रावों में उपस्थित अधिक नाइट्रोजन एवं फॉस्फोरस से शैवाल में अतिशय वृद्धि होती है। सतह पर अधिक मोटी काई के कारण सूर्य-प्रकाश अधिक गहराई तक नहीं पहुँच पाता। (ii) प्रदूषित जल में अन्य सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ती है। ये सूक्ष्म जीव समूह में एकत्रित हो जाते हैं, जिन्हें मल-कवक (sewage fungus) के रूप में जाना जाता है। (iii) प्रदूषक तत्व धीरे-धीरे तलहटी पर जमा होते जाते हैं, फलस्वरूप जड़ वाले जलीय पौधे समाप्त होते जाते हैं एवं जलीय खरपतवार (जल हायसिंथ, जलीय फर्न, जलीय लेट्यूस आदि में वृद्धि होती है। (iv) तापीय प्रदूषण से जल का तापमान बढ़ता है जिससे प्लवक एवं शैवालों की वृद्धि होने से जलीय ऑक्सीजन में कमी आती है। जलीय वनस्पति पर ही जलीय जन्तुओं का जीवन आधारित होता है। अतः जल-प्रदूषण से जलीय वनस्पति के साथ ही जलीय जन्तुओं पर भी प्रभाव होते हैं। संक्षेप में निम्न प्रभाव होते हैं- (i) ऑक्सीजन की कमी से अनेक जन्तु, विशेषकर मछलियाँ मरने लगती हैं। 1940 में जल के एक लीटर नमूने में सामान्यतया 2.5 घन सेमी. Essay on my favourite singer in marathi quizlet. Essay on different types of air pollution facts

<strong>Air</strong> <strong>Pollution</strong>, Water <strong>Pollution</strong> and Noise <strong>Pollution</strong> <strong>Essay</strong>

Air Pollution, Water Pollution and Noise Pollution Essay The dictionary definition of pollution is to make air, water, soil, etc. Air Pollution, Water Pollution and Noise Pollution! The dictionary definition of pollution is to make air, water, soil, etc. dangerously dirty and not suitable for.

<strong>Air</strong> <strong>pollution</strong> <strong>essay</strong> ~ Www.

Air pollution essay ~ Www. It is a man-made problem mainly caused by human waste material, release of poisonous gases and other chemical pollutants from the industry, agricultural pollutants like pesticides, and chemical fertilizers, pollutants by automobiles and dumping of chemical and nuclear wastes, etc. In many ways, it has changed both the individual and social ways of life. How to prevent air pollution essay riordan manufacturing take action reduce clean make more is an educational outreach initiative created inform maricopa.


Air pollution essay in marathi:

Rating: 100 / 100

Overall: 94 Rates